बारिश…

 बारिश…

 बारिश…
अच्छी लगती है
जब हाथ में चाय का कप हो

बारिश
छू लेती है…
बस भीगने का मन हो

बारिश…
भगाती है…
जब सिर पर छत न हो

बारिश…
रोक लेती है…
अगर रास्ता कठिन हो

बारिश…
हरियाली देती है…
बस वक्त सही हो

बारिश…
सूखा छोड़ जाती है…
अगर ज्यादा खफा हो

बारिश…
मेघधनुष दिखाती है…
जब किरणे साथ हो

बारिश…
डरा देती है…
जब अपने घर लौटे ना हो

बारिश…
सैलाब सी लगती है…
जब तालाब छोटा हो 

बारिश…
बूंदो मे सिमट जाती है…
जब अपना आँगन बड़ा हो

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