दरिया

 दरिया होकर भी  यूं ही नहीं भेजता मै लहरों को किनारे पर 

यह तो तस्वीर खींचता रहता हूं  जब भागता है कोई  कूड़ा कचरा डालकर 

शांति से चुपचाप  बहता रहता हूं पूरा दिन इधर से उधर 

पर जब तुम  मेरी लहरों को छोड़ सुनते रहते हो गीत  कानों में वायर डालकर 

मन करता है  सुनाऊँ शोर अपनी सारी लहरों को पछाड़कर 

पर तुम तो बिना रुके  बढ़ जाओगे आगे अपना कद्दू सा मुँह बनाकर

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