रूक ना तू, बस चलता जा

रूक ना तू, बस चलता जा । उठा कदम और बढता जा ।। काहे खुद से भागे, जा बेफिक्र आगे । ना सोना तु पिछे, वहाँ तो सुरज भी न जागे ।। हो खुद पर यकीन, तब सब मुमकिन ।… Continue reading

छोटी सी चिड़िया

इक  छोटी सी  चिड़िया  बाग़  में  उड़ा  करती  थी, कभी  इधर तो कभी उधर, बस  युहीं  टहला करती थी थके  न  कभी  उसके  पंख, हवा में  लहराया करती थी, कितना  ऊपर,  कितना  नीचे,  कभी  न  परवाह  करती थी बिना  डरे… Continue reading